
बुढापे की उम्र अब बदल गई है. साइंस के नए रिसर्च भी कह रहे हैं कि अब बुढ़ापा देर से आ रहा है. 20वीं सदी तक बुढ़ापा आम तौर पर 55 या 60 वर्ष की उम्र से माना जाता था. यह सीमा रिटायरमेंट, शारीरिक कमजोरी और बीमारियों की बढ़ती परेशानियों पर आधारित थी. औद्योगिक देशों में औसत जीवन प्रत्याशा 60-65 के आसपास थी, इसलिए 60 को जीवन का अंतकाल माना जाता था. लेकिन अब ऐसा नहीं रहा.
अब ये देखते हैं कि साइंस के नए रिसर्च और WHO क्या कहता है. वैसे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट कहती है, “2030 तक विकसित देशों में हर तीसरा बच्चा 100 साल तक जिएगा. इसका मतलब है कि 60 साल की उम्र अब जीवन का मध्य भाग है, अंतिम नहीं.” नेचर एजिंग जर्नल की वर्ष 2021 में की गई एक रिसर्च कहती है, “बुढ़ापा कैलेंडर की उम्र से नहीं, शरीर की जैविक स्थिति से तय होता है.” द लेंसेट की वर्ष 2022 की पब्लिक हेल्थ रिपोर्ट कहती है कि अब बुढ़ापा 60 या 65 साल पर शुरू नहीं होता बल्कि ये बढ़ गई है.
